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कितना स्क्रीन टाइम आंखों के लिए असुरक्षित है?

  • 12 hours ago
  • 6 min read
कितना स्क्रीन टाइम आंखों के लिए असुरक्षित है?

आज के डिजिटल युग में मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट और टीवी हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। सुबह उठते ही फोन देखना, पूरे दिन कंप्यूटर पर काम करना और रात में सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हुए सोना अब आम आदत बन गई है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रोजाना कई घंटों तक स्क्रीन देखने का आपकी आंखों पर क्या असर पड़ता है? क्या वास्तव में कोई ऐसी सीमा है जिसके बाद स्क्रीन टाइम आंखों के लिए असुरक्षित हो जाता है? अधिकांश लोग मानते हैं कि स्क्रीन देखने से आंखों की रोशनी स्थायी रूप से कमजोर हो जाती है, जबकि सच यह है कि लंबे समय तक बिना ब्रेक स्क्रीन देखने से आंखों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इससे आंखों में सूखापन, जलन, धुंधला दिखाई देना, सिरदर्द और डिजिटल आई स्ट्रेन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। यदि समय रहते इन संकेतों को नजरअंदाज किया जाए, तो यह आपकी आंखों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन दोनों को प्रभावित कर सकता है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि कितना स्क्रीन टाइम सुरक्षित माना जाता है, कितने घंटे के बाद यह आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है, लंबे समय तक स्क्रीन देखने के दुष्प्रभाव क्या हैं और अपनी आंखों को सुरक्षित रखने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।



स्क्रीन टाइम क्या होता है?

स्क्रीन टाइम से तात्पर्य उस कुल समय से है जो आप मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट, स्मार्ट टीवी या किसी भी डिजिटल स्क्रीन को देखने में बिताते हैं। आज अधिकांश लोगों का काम, पढ़ाई, मनोरंजन, ऑनलाइन शॉपिंग, बैंकिंग और सोशल मीडिया सभी स्क्रीन पर निर्भर हो चुके हैं। ऐसे में कई लोग बिना महसूस किए प्रतिदिन 8 से 12 घंटे तक स्क्रीन का उपयोग कर लेते हैं। समस्या केवल स्क्रीन देखने की नहीं है, बल्कि लगातार बिना ब्रेक स्क्रीन देखने की है। जब हम लंबे समय तक स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो हमारी पलकें सामान्य से कम झपकती हैं। इससे आंखों की नमी कम होने लगती है और आंखें थकी हुई महसूस होने लगती हैं।



कितना स्क्रीन टाइम आंखों के लिए असुरक्षित माना जाता है?

किसी भी विशेषज्ञ द्वारा ऐसा कोई निश्चित नियम नहीं बनाया गया है कि "6 घंटे के बाद स्क्रीन देखना पूरी तरह असुरक्षित है।" असल बात यह है कि स्क्रीन देखने का तरीका, बीच-बीच में लिया गया ब्रेक, स्क्रीन की दूरी, रोशनी और आपकी आंखों की स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। यदि कोई व्यक्ति लगातार 2 से 3 घंटे बिना रुके स्क्रीन देखता है, तो आंखों पर काफी तनाव पड़ सकता है। वहीं यदि आपका कुल स्क्रीन टाइम 8 से 10 घंटे या उससे अधिक है और आप बीच में पर्याप्त ब्रेक नहीं लेते, तो Digital Eye Strain का खतरा काफी बढ़ जाता है।

जो लोग आईटी, डिज़ाइन, ऑनलाइन पढ़ाई, गेमिंग या कंटेंट क्रिएशन जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं, उन्हें विशेष रूप से अपनी आंखों का ध्यान रखने की आवश्यकता होती है।



उम्र के अनुसार सुरक्षित स्क्रीन टाइम

हर उम्र के लोगों के लिए स्क्रीन टाइम की आवश्यकता और प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं। छोटे बच्चों के लिए स्क्रीन का उपयोग जितना कम हो उतना बेहतर माना जाता है। पढ़ाई के अलावा अतिरिक्त स्क्रीन देखने की आदत उनके आंखों के विकास और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पर असर डाल सकती है। स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों को भी लगातार कई घंटे स्क्रीन देखने से बचना चाहिए। पढ़ाई के दौरान नियमित अंतराल पर ब्रेक लेना बेहद जरूरी है। वयस्कों के लिए यदि काम के कारण पूरे दिन कंप्यूटर का उपयोग करना जरूरी हो, तो हर 20 मिनट में आंखों को आराम देना और सही दूरी बनाए रखना आवश्यक है।




लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

जब हम लगातार स्क्रीन देखते हैं, तो आंखों की मांसपेशियां लगातार फोकस बनाए रखने का प्रयास करती रहती हैं। इससे आंखों में थकान आने लगती है। इसके अलावा स्क्रीन से निकलने वाली तेज रोशनी और चमक आंखों पर अतिरिक्त दबाव डालती है। समय के साथ व्यक्ति को धुंधला दिखाई देना, आंखों में जलन, बार-बार आंखें मलने की इच्छा, आंखों का लाल होना और सिरदर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं। कई बार लोग इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह Digital Eye Strain का शुरुआती संकेत हो सकता है।



डिजिटल आई स्ट्रेन (Digital Eye Strain) क्या है?

Digital Eye Strain, जिसे Computer Vision Syndrome भी कहा जाता है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें लंबे समय तक डिजिटल स्क्रीन देखने के कारण आंखों में असुविधा होने लगती है। यह आज के समय की सबसे आम आंखों की समस्याओं में से एक बन चुकी है। इसके सामान्य लक्षणों में आंखों में दर्द, सूखापन, जलन, धुंधला दिखाई देना, फोकस करने में कठिनाई, गर्दन और कंधे में दर्द तथा सिरदर्द शामिल हैं। यदि ये लक्षण रोजाना महसूस होने लगें, तो केवल आई ड्रॉप्स का उपयोग करना पर्याप्त नहीं होता। ऐसे में आंखों की जांच करवाना जरूरी हो जाता है।



क्या स्क्रीन देखने से आंखों की रोशनी कम हो जाती है?

यह एक बहुत बड़ा मिथक है कि मोबाइल या कंप्यूटर देखने से आंखों की रोशनी हमेशा के लिए कमजोर हो जाती है। असल में लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों पर अस्थायी तनाव पड़ता है, जिससे कुछ समय के लिए धुंधला दिखाई दे सकता है। यदि पहले से चश्मे का नंबर है या आंखों की कोई समस्या है, तो स्क्रीन देखने से उसकी परेशानी अधिक महसूस हो सकती है। हालांकि बच्चों में अत्यधिक स्क्रीन टाइम और आउटडोर गतिविधियों की कमी मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) बढ़ने का एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।



बच्चों पर ज्यादा स्क्रीन टाइम का प्रभाव

आज छोटे बच्चे भी मोबाइल और टैबलेट का उपयोग काफी अधिक करने लगे हैं। इससे उनकी आंखों के साथ-साथ उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर भी असर पड़ सकता है। लगातार स्क्रीन देखने से बच्चों में आंखों की थकान, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, नींद की समस्या और मायोपिया का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर विशेष ध्यान देना चाहिए और उन्हें रोजाना कुछ समय बाहर खेलने के लिए प्रेरित करना चाहिए।



आंखों को स्क्रीन से होने वाले नुकसान से कैसे बचाएं?

यदि आपका काम स्क्रीन पर निर्भर है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। कुछ आसान आदतें अपनाकर आंखों को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है। सबसे पहले 20-20-20 नियम अपनाएं। हर 20 मिनट बाद लगभग 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। इससे आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है।

स्क्रीन और आंखों के बीच लगभग 20 से 28 इंच की दूरी रखें। स्क्रीन का ऊपरी हिस्सा आंखों के स्तर से थोड़ा नीचे होना चाहिए ताकि आंखों पर कम दबाव पड़े। कमरे में पर्याप्त रोशनी रखें और स्क्रीन की ब्राइटनेस को आसपास की रोशनी के अनुसार एडजस्ट करें। बहुत अधिक या बहुत कम ब्राइटनेस दोनों ही आंखों के लिए हानिकारक हो सकती हैं। बार-बार पलकें झपकाने की आदत डालें। सामान्यतः व्यक्ति एक मिनट में लगभग 15 से 20 बार पलक झपकता है, लेकिन स्क्रीन देखते समय यह संख्या काफी कम हो जाती है, जिससे आंखों में सूखापन बढ़ता है।



क्या ब्लू लाइट चश्मा जरूरी है?

आजकल ब्लू लाइट फिल्टर वाले चश्मे काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। हालांकि अभी तक वैज्ञानिक प्रमाण यह स्पष्ट रूप से नहीं बताते कि ये हर व्यक्ति के लिए आवश्यक हैं। यदि आपको लंबे समय तक स्क्रीन देखने के दौरान आंखों में असुविधा महसूस होती है, तो पहले आंखों की जांच करवाएं। कई बार सही नंबर का चश्मा या कार्यस्थल की रोशनी सुधारना ही पर्याप्त होता है।



कब तुरंत Eye Specialist से मिलना चाहिए?

यदि स्क्रीन देखने के बाद होने वाली परेशानी आराम करने के बाद भी ठीक नहीं होती, या आपको बार-बार धुंधला दिखाई देता है, आंखों में लगातार दर्द रहता है, तेज सिरदर्द होता है, दोहरी तस्वीर दिखाई देती है या आंखों की लालिमा कई दिनों तक बनी रहती है, तो बिना देरी किए किसी अनुभवी नेत्र विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए। नियमित Eye Checkup से आंखों की कई गंभीर बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकता है।



निष्कर्ष

डिजिटल दुनिया से पूरी तरह दूर रहना आज लगभग असंभव है, लेकिन अपनी आंखों की सुरक्षा करना पूरी तरह संभव है। यदि आपका स्क्रीन टाइम प्रतिदिन कई घंटों का है, तो सही दूरी बनाए रखें, नियमित ब्रेक लें, पर्याप्त पलकें झपकाएं और 20-20-20 नियम को अपनी आदत बनाएं। याद रखें कि समस्या केवल स्क्रीन देखने से नहीं होती, बल्कि बिना रुके लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होती है। यदि आपकी आंखें बार-बार थकती हैं, जलन होती है या धुंधला दिखाई देता है, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर आंखों की जांच करवाना आपकी दृष्टि को लंबे समय तक स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा तरीका है।


अधिक जानकारी के लिए इस नंबर पर संपर्क करें: 96 25 903017


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